छत्तीसगढ़ का चिरायता (भुइनीम चरैता): कड़वी है पर मधुमेह, बुखार और लिवर के लिए अमृत – जानिए छत्तीसगढ़ी नाम, गुण और उपयोग

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रायपुर/बस्तर।* छत्तीसगढ़ के जंगलों में एक ऐसी कड़वी जड़ी-बूटी पाई जाती है, जिसे आयुर्वेद में ‘किराततिक्त’ और ‘भूनिम्ब’ कहा गया है। हम बात कर रहे हैं *चिरायता (Chirayta)* की, जिसे छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अंचलों में *चरैता, चिरैता* के नाम से जाना जाता है।सनातन योग फाउंडेशन के निदेशक *योगाचार्य आर्य प्रकाश चंद्राकर* ने बताया कि चिरायता स्वाद में भले ही बहुत कड़वा हो, पर इसके औषधीय गुण अनगिनत है

वैज्ञानिक नाम: _Swertia chirata_ (स्वेर्टिया चिराटा)

कुल: Gentianaceae

संस्कृत नाम: किराततिक्त, भूनिम्ब, किरात

हिंदी नाम: चिरायता

छत्तीसगढ़ी नाम: *चरैता / चिरैता*

अंग्रेजी: Bitter Stick / Green Chiretta

 पौधे की पहचान कैसे करें?*

यह 2 से 4 फीट ऊँचा एक वर्षीय पौधा है। इसका तना सीधा, गोल और पीले-हरे रंग का होता है। पत्तियाँ 10 सेमी लंबी, भाले के आकार की और बहुत कड़वी होती हैं। फूल छोटे सफेद-बैंगनी रंग के होते हैं। पूरा पौधा ही औषधि के रूप में उपयोग होता है।

. छत्तीसगढ़ में कहाँ-कहाँ मिलता है?*

मूल रूप से यह हिमालयी क्षेत्र (कश्मीर से अरुणाचल तक) का पौधा है, पर अब छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और नम जंगलों में भी खूब मिलता है।

योगाचार्य आर्य प्रकाश चंद्राकर के अनुसार, यह मुख्यतः –

*महासमुंद बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सरगुजा, जशपुर, कोरबा, कवर्धा और अंबिकापुर जिलों * के छायादार, नमी वाले पहाड़ी ढलानों और नदी-नालों के किनारे पाया जाता है।

आयुर्वेद में क्या गुण बताए गए हैं?*

आयुर्वेद के अनुसार इसमें रूक्ष, लघु, तिक्त गुण होते हैं। यह कफ-पित्त शामक, ज्वरनाशक, रक्तशोधक और कृमिनाशक माना जाता है। इसमें अमरोजेंटिन (Amarogentin), स्वेर्टियामेरिन, मैंगिफेरिन जैसे बायोएक्टिव तत्व पाए जाते हैं।

प्रमुख लाभ -*

*योगाचार्य आर्य प्रकाश चंद्राकर* बताते हैं कि –मधुमेह में सहायक:* शोध (2018, पिनाकी डे et al.) में पाया गया है कि चिरायता में हाइपोग्लाइसेमिक गुण होते हैं जो इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को सक्रिय करने में मदद कर सकते हैं।

– *बुखार और मलेरिया में:* यह पुराने बुखार में ज्वरनाशक के रूप में उपयोग होता है।

– *लिवर और पाचन के लिए:* लिवर को डिटॉक्स करने, भूख बढ़ाने, गैस-अपच और पेट के कीड़े निकालने में पारंपरिक रूप से उपयोगी माना जाता है।– *रक्तशुद्धि और त्वचा रोग:* खून साफ करने और फोड़े-फुंसी में इसके काढ़े का प्रयोग होता है।

सेवन विधि (पारंपरिक) –

 

– *चिरायता का पानी:* 1-2 ग्राम सूखा चिरायता रात भर 1 गिलास पानी में भिगोकर सुबह छानकर पीते हैं।

– *काढ़ा:* बुखार में 5 ग्राम चिरायता को 200ml पानी में उबालकर आधा रहने पर छानकर लेते हैं।

सावधानी:*यह बहुत कड़वी और शक्तिशाली औषधि है। अधिक मात्रा में सेवन से उल्टी, चक्कर आ सकते हैं। गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और गंभीर रोगी *वैद्य की सलाह के बिना सेवन न करें।* यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है।*रिपोर्ट: योगाचार्य आर्य प्रकाश चंद्राकर, निदेशक – सनातन योग फाउंडेशन*

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Author: News Bharat Live

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