छत्तीसगढ़ के स्कूलों में शाला प्रबंधन एवं विकास समिति (SMDC) को समाप्त कर दिया गया है। अब कक्षा पहली से 12वीं तक केवल एक ही शाला प्रबंधन समिति (SMC) गठित की जाएगी, जिसके पास विद्यालय के संचालन और ₹1 लाख तक के निर्माण कार्यों की वित्तीय व प्रशासनिक कमान होगी।
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग की नई गाइडलाइन के प्रमुख बिंदु:
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- गठन: शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के 1 महीने के भीतर समिति का गठन अनिवार्य है।
- सदस्य: समिति में कुल 75% सदस्य बच्चों के माता-पिता या अभिभावक होंगे।
- महिला आरक्षण: कुल सदस्यों में से 50% महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है।
- बैठकें: समिति की बैठक हर महीने कम से कम एक बार आयोजित करना और उसमें 50% सदस्यों की उपस्थिति जरूरी है।
समिति स्कूलों में शौचालय निर्माण, बिजली, पेयजल, रैंप और लघु मरम्मत जैसे ₹1 लाख तक के कार्य अन्य एजेंसियों के बजाय खुद करा सकेगी । इसमें राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन या कौशल विकास प्राधिकरण से प्रशिक्षित स्थानीय राजमिस्त्री, प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन को प्राथमिकता देनी होगी ।
नए नियम में यह होंगे प्रावधान
बच्चों के कुल नामांकन के आधार पर सदस्य तय होंगे । 100 बच्चों तक 12 से 15, 500 बच्चों तक 15 से 20 और इससे अधिक पर 20 से 25 सदस्यों की कमेटी बनेगी । पूरी समिति में 50 प्रतिशत महिला सदस्य होना अनिवार्य है, जिससे स्कूल प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी आधी होगी ।
Author: News Bharat Live
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