*धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव दिवस पर विशेष कार्यक्रम सम्पन्न*

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बागबाहरा — शासकीय खेमचंद लक्ष्मीचंद कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय बागबाहरा में आज धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती एवं जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि श्री भीखम सिंह ठाकुर उपाध्यक्ष जिला पंचायत महासमुंद, कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रश्मि मिंज ने की। तथा मुख्य वक्ता के रूप में श्री कुबेर यदु सामाजिक कार्यकर्ता एवं सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग उपस्थित रहे तथा सामाजिक कार्यकर्ता ओमप्रकाश ध्रुव एवं मंडल महामंत्री ताराचंद देवांगन उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथि के रूप में सुश्री सविता दिवान, युवा पार्षद, नगर पालिका बागबाहरा तथा कार्यक्रम संयोजक प्राध्यापक ठाकुर सर सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

प्रदर्शनी का अवलोकन एवं कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा इतिहास विभाग द्वारा सुसज्जित प्रदर्शनी के अवलोकन से हुआ। प्रदर्शनी में जनजातीय नायकों के जीवन, उनकी संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका तथा भगवान बिरसा मुंडा से संबंधित ऐतिहासिक एवं दुर्लभ छायाचित्र प्रदर्शित किए गए थे। अतिथियों ने इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया।

इसके पश्चात जनजातीय महापुरुषों के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। अतिथियों का पुष्पगुच्छ और तिलक लगाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. रश्मि मिंज ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के ऐसे दिव्य नायक थे जिन्होंने समाजिक समरसता, आत्मसम्मान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की अमिट मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, जीवन-पद्धति और प्रकृति के प्रति समर्पण हमें सतत विकास का सही मार्ग दिखाता है।

मुख्य अतिथि श्री भीखम सिंह ठाकुर ने भगवान बिरसा मुंडा की जीवन गाथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन नेतृत्व, साहस और संघर्ष की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने ‘उलगुलान’ के माध्यम से अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनक्रांति का ऐसा स्वर उठाया जिसने देशभर में स्वतंत्रता की चेतना को प्रज्वलित किया।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के नायक सदैव आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और न्याय के लिए संघर्षरत रहे हैं और आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।

मुख्य वक्ता श्री कुबेर यदु का विस्तृत ऐतिहासिक उद्बोधन

मुख्य वक्ता श्री कुबेर यदु ने भारतीय संस्कृति में जनजातीय समाज के योगदान को उजागर करते हुए

उन्होंने कहा कि —

“जनजातीय नायकों ने न केवल भारतीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखा बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की प्रथम पंक्ति में खड़े होकर अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे पहले आवाज उठाई।’’

श्री यदु ने अपने उद्बोधन में कई वीर जनजातीय नायकों के अप्रतिम योगदान को रेखांकित किया उन्होंने

तिलका मांझी को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शहीद बताते हुए बताते हुए कहा कि 1784 में उन्होंने अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूंका और अपनी जान की बाज़ी लगाकर स्वाधीनता के लिए युवाओं को प्रेरित किया।

धरती आबा बिरसा मुंडा के ‘उलगुलान’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा जनजातीय स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक परिवर्तन के महानतम प्रतीक हैं।

पूंजा भील जैसे मध्य भारत के वीरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भील योद्धाओं ने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लगातार प्रतिरोध की चिंगारी को जलाए रखा।

छत्तीसगढ़ के संदर्भ में उन्होंने विशेष रूप से सोनाखान के जमींदार शहीद वीर नारायण सिंह का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 1857 के संग्राम में वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उभरे, जिन्होंने गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के कारण अंग्रेजों से संघर्ष किया और अंततः फांसी का वरण कर लिया।

श्री यदु ने कहा कि इन सभी जनजातीय नायकों का जीवन हमें बताता है कि राष्ट्र के सम्मान, संस्कृति और उसके हित में खड़ा होना ही सच्चा देशप्रेम है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे इन प्रेरणादायी नायकों के जीवन से सीख लेकर समाज और देश के विकास में अपनी भूमिका निभाएँ।

कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का सफल संचालन प्राध्यापक श्री गजानंद बुडेक ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन कार्यक्रम संयोजक प्राध्यापक ठाकुर सर ने किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत जनजातीय सांस्कृतिक नृत्य और गीतों ने कार्यक्रम में ऊर्जा और उत्साह का वातावरण बना दिया।

इस प्रकार जनजातीय गौरव दिवस का यह आयोजन प्रेरणा, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रभक्ति की भावनाओं से परिपूर्ण होकर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

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Author: News Bharat Live

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